परिचय

‘साहित्य संस्कृति पत्रिका’ हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और भारतीय संस्कृति की बहुआयामी संरचना को समकालीन संदर्भों में समझाने का एक गंभीर अकादमिक प्रयास है। यह पत्रिका साहित्य को समाज, इतिहास, धर्म और संस्कृति की अंतःक्रियात्मक प्रक्रिया के रूप में देखती है तथा रचनात्मक अभिव्यक्तियों का अध्ययन उनके सामाजिक और वैचारिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत करती है। हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा भक्ति, रीति, आधुनिक और समकालीन आंदोलनों से होकर सामाजिक चेतना के निर्माण में निरंतर सक्रिय रही है, ऐसे मेंयह पत्रिका उसी परंपरा से संवाद स्थापित करती है। भारतीय संस्कृति लोक, श्रम, संघर्ष और सामूहिक स्मृति से निर्मित हुई है। संस्कृति में लोकगीतों, कथाओं, मिथकों, पर्व-परंपराओं और जनजीवन के अनुभवों में संस्कृति की जो धारा प्रवाहित होती है वह साहित्य को जीवन से सम्बद्ध करती है। यह पत्रिका भारत की सांस्कृतिक बहुलता को साहित्यिक विमर्श के केंद्र में रखती है और यह मानती है कि साहित्यिक रचनाएँ अपने समय की सामाजिक संरचनाओं, सत्ता-संबंधों और मूल्यबोध को प्रतिबिंबित करती हैं। समकालीन हिंदी साहित्य में सामाजिक न्याय, समानता, अस्मिता, स्त्री-विमर्श, दलित चेतना और श्रम-संस्कृति जैसे प्रश्न विशेष महत्त्व रखते हैं। यह पत्रिका इन प्रश्नों को साहित्यिक रचनाओं और आलोचनात्मक लेखन के माध्यम से गंभीरतापूर्वक उठाने का प्रयास करती है। इसमें कविता, कथा, आलोचना और वैचारिक लेखों के चयन में सामाजिक प्रासंगिकता, वैचारिक स्पष्टता और भाषिक संयम को प्रमुख आधार माना गया है।

‘साहित्य संस्कृति पत्रिका’ संस्कृति को ऐतिहासिक अनुभवों और सामाजिक परिवर्तनों से निर्मित होती हुई प्रक्रिया के रूप में समझती है। इसी दृष्टि के अंतर्गत यह पत्रिका परंपरा और आधुनिकता के बीच के संबंधों एवं लोक और शास्त्र के संवाद तथा हाशिए के सांस्कृतिक अनुभवों का विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यहाँ संस्कृति को सत्ता के उपकरण के रूप में न मानकर सामाजिक चेतना के निर्माण की प्रक्रिया के रूप में देखा गया है। यह पत्रिका आलोचनात्मक विवेक और वैचारिक बहुलता को अकादमिक विमर्श का अनिवार्य अंग मानती है। पत्रिका में किसी एक विचारधारा के प्रतिपादन के स्थान पर संवाद, विमर्श एवं असहमति की लोकतांत्रिक संस्कृति को महत्त्व दिया गया है। पत्रिका के केंद्र में रचनाकार, पाठक और शोधार्थी तीनों के बीच बौद्धिक सहभागिता को सशक्त बनाना। हमें विश्वास है कि ‘साहित्य संस्कृति पत्रिका’ (त्रैमासिक) हिंदी साहित्य और संस्कृति के अध्येताओं, शोधार्थियों तथा पाठकों के लिए एक विश्वसनीय और विचारोत्तेजक मंच सिद्ध होगी तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में सार्थक हस्तक्षेप कर सकेगी।

डॉ. अनिल कुमार

(प्रधान संपादक)

असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी

स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय

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Sahitya Sanskriti Patrika
Multidisciplinary-Multilingual Quarterly E-Magazine Of Literature, Society & Culture

प्रकाशक: साहित्य संस्कृति पत्रिका समूह
प्रधान संपादक: डॉ. अनिल कुमार

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